क्यों नहीं कोई ब्राह्मण भंगी है?
क्यों नहीं कोई ठाकुर गटर साफ़ करता?
क्यों नहीं कोई दलित तुम्हारा पुरोहित है?
क्यों नहीं कोई औरत मौलवी होती?
ये विभेद ही तो ब्राह्मणवाद है
इसका हिन्दू या मुसलमान से कोई लेना देना नही!
एक जन्मजात श्रेष्ठ है और दूसरा जन्म से मनहूस,
ये विचार ही ब्राह्मणवाद है;
यही हर धर्म का आधार है।
बड़ा अफ़सोस है क़ि
तुम्हें इस घटियापन से प्यार है!!
मैं न कर सकूँगा ये सब,
क़ि मुझे तो 'कमल' एक अदद इंसान से प्यार है।।