चीनी चालों की चतुराई, समझो ऐ भारत वालो!
मत खोना तुम अपना धीरज, ओ सीमा के रखवालो।
महामारी और अर्थव्यवस्था के संकट की इस बेला में..
नेपाल, चीन और पाक से घिरा, भारत पड़ा अकेला है
संकट की बेला में देखो, धीरज है सफल सवारी।
कूटनीति की चाल रही है, सदा युद्ध पे भारी।
यदि होगा अपरिहार्य युद्ध तो, किंचित ना घबराएंगे
अपना खून बहाकर हम दुश्मन की लाश बिछाएंगे।
एक लड़ेगा फिर लाखों से, चिड़ियों से बाज तड़ाएंगे।
शैतान, सोम, अब्दुल हमीद का, शौर्य पुन: दोहराएंगे।
यदि पड़ी जरूरत तो सीने को गोली की सेज बना देंगे।
एक कदम ना बढ़ने देंगे, दुश्मन की चूल हिला देंगे!
पर समय नहीं यह उचित कदाचित, सीमा पर खून बहाने का।
व्यापार चीन से बन्द करो, ये नाटक गले लगाने का।
चीनी सामानों की होली, भारत जो अगर जला देगा!
घुटनों पर आएगा ड्रैगन, पीछे खुद कदम हटा लेगा!!
चाइनीज माल की नो एन्ट्री कर दो वो पल भी आएगा।
जब बीजिंग घुटनों पर चल कर , दिल्ली में शीश नवाएगा।
सेनाएं जाएंगी पीछे, ड्रैगन फिर मुंह की खाएगा।
फिर से गलवां घाटी में, भारत का ध्वज फहराएगा।