Monday, 3 August 2020

क्या है ब्राह्मणवाद?

क्यों नहीं कोई ब्राह्मण भंगी है?
क्यों नहीं कोई ठाकुर गटर साफ़ करता?
क्यों नहीं कोई दलित तुम्हारा पुरोहित है?
क्यों नहीं कोई औरत मौलवी होती?
ये विभेद ही तो ब्राह्मणवाद है
इसका हिन्दू या मुसलमान से कोई लेना देना नही!
एक जन्मजात श्रेष्ठ है और दूसरा जन्म से मनहूस,
ये विचार ही ब्राह्मणवाद है;
यही हर धर्म का आधार है।
बड़ा अफ़सोस है क़ि 
तुम्हें इस घटियापन से प्यार है!!
मैं न कर सकूँगा ये सब,
क़ि मुझे तो 'कमल' एक अदद इंसान से प्यार है।।

Sunday, 19 July 2020

नेपाल की बिना गारंटी वाली: चाइनीज़ जुबान!

      नेपाल से चाइनीज माल की सप्लाई तो काफी लंबे समय से होती रही है मगर आजकल तो नेपाल की तरफ से से बिना गारंटी और वारंटी वाली चाइनीज टाइप  खबरें आ रही हैं।🤣
वैसे नेपाल खुद को एक संप्रभु राष्ट्र यानी कि सुवरीन कंट्री कहता है मगर आजकल उसके सस्ते, हल्के और बिना वारंटी वाले😀 बड़े-बड़े बोल सुनकर तो लगता है कि उसका प्रभु कोई और ही होता जा रहा है!🤣वरना वो कुछ भी करता मगर प्रभु श्री राम की जन्म भूमि  पर दावा करने की जुर्र्त तो कम से कम नहीं ही करता!👏👏

वैसे नेपाल समझदार है उसने देख लिया कि लिंपियाधूरा, काला पानी और लिपुलेख पर तो उसका दावा किसी काम का नहीं है क्योंकि हमारी सेना तो सपने में भी  उसे इन जगहों को छूने नहीं देगी इसलिए उसने इस बार चतुराई दिखाते हुए  माइथोलॉजी का सहारा लिया।😀

सब जानते हैं कि भगवान शिव का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ का मंदिर नेपाल में है। लाखों भारतीय प्रतिवर्ष इस मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं। नेपाल चाहता तो भोलेनाथ पर भी अपना कब्जा बता सकता था मगर नेपाल जानता है कि आजकल भारत में राम राज चल रहा है😂😂 इसलिए उसने बाकी देवताओं पर अपना कब्जा जमाने की कोशिश नहीं की, और सीधे श्री राम पर अटैक किया।😂

सुना है कि नेपाल के थोरी नामक जगह पर श्री राम जन्मभूमि की खुदाई की जाएगी मगर खुदाई करने वालों को कौन समझाए कि राम मिट्टी की खुदाई से नहीं अंतर्मन की खुदाई से मिलते हैं! मिट्टी के नीचे तो न वो भारत में मिले और ना नेपाल में मिलेंगे और मिल भी जाएंगे तो किसी काम ना आएंगे!👏👏
इधर भारत में चुटकी लेने वाले कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर राम नेपाल के थे, रावण लंका का था तो तो नेपाल इस बात का हिसाब दे कि राम रावण युद्ध में भारत से बंदरों की सप्लाई किस आधार पर की गई!😃 भारत के जितने वानर उस युद्ध में मारे गए नेपाल  इन सब का मुआवजा दे।😂इस हिसाब से अगर कैलकुलेट करेंगे तो कम से कम आधा नेपाल गिरवी रखना पड़ेगा!🤣

 कुछ खबर नवीसों का कहना है कि अभी तो नेपाल ने केवल राम पर कब्जा किया है कुछ दिनों बाद वह  चीन के इशारे पर हमारे नव ग्रहों यानी कि  सूर्य, बुध, मंगल, पृथ्वी, शुक्र, शनि वगैरा-वगैरा  पर भी कब्जा  कर सकता है। वैसे मेरी व्यक्तिगत राय है कि यदि वास्तव में ऐसा होता है  तो  शनि, राहु, केतु  को तो हर हालत में नेपाल को सौंप दिया जाना चाहिए 🤣क्योंकि इन 3 पाप ग्रहों ने भारत के कई लोगों को अंधविश्वास के दलदल में डूबो रखा है।😂लेकिन वहीं ये बात भी  गौरतलब है कि इन तीनों की बदौलत बेचारे कई विद्वान पंडितों, ज्योतिषियों और ठगों की गृहस्थी चल रही है। 😂 ऐसे में  ग्रहों के हस्तांतरण का मामला भी खटाई में पड़ता हुआ ही नजर आ रहा है!🤣क्योंकि ऐसा करने से कोरोना की साढ़ेसाती से पीड़ित चल रही अर्थव्यवस्था पर शनिचरी ढैय्या और गुरु चांडाल योग का घातक प्रहार भी हो सकता है!

इस तरह अगर देखें तो कोई सीमा की बात कर रहा है, कोई भगवान की बात कर रहा है, कोई बंदरों की बात कर रहा है, कोई शनि, राहु और केतु की बात कर रहा है मगर इन सबके बीच कोई भी ऐसा नहीं है जो कि इंसानों की बात कर रहा हो!👏👏

लोग कह रहे हैं कि नेपाल पर चीनी प्रभाव के कारण ऐसा हो रहा है। मगर हमारी समझ से चीनी प्रभाव कितना ही कड़वा क्यों ना हो वह नेपाल और भारत के ऐतिहासिक और सामाजिक संबंधों की मिठास को कम नहीं कर पाएगा। हमारी संस्कृति, हमारी भाषा, हमारे रीति रिवाज, हमारे लोक पर्व सब साझे हैं। सच यह है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत एक है। हमारे अतीत के पन्ने परस्पर सौहार्द और पारिवारिक संबंधों की मिठास से जुड़े हुए हैं। इसको ना तो नेपाल के कुछ बेवकूफ अलग कर सकते और नहीं भारत के! और चीनी करेले तो बिल्कुल भी नहीं!

Wednesday, 15 July 2020

अमिताभ बच्चन महानायक हैं महामानव नहीं!

 बच्चन साहब को करो ना हो गया है 
 जुर्रत तो देखिए बे अदब वायरस की...  शहंशाह का ही कॉलर पकड़ लिया! अरे शहंशाह का न सही सदी के महानायक का तो लिहाज कर लिया होता रे!
मगर कुरौना भी तो कहां कम है अगर बिग बी सदी के महानायक हैं तो कोरोना  भी तो खुद को सदी की महामारी समझता है!
 
सदी के महानायक को  हुई सदी की महामारी!
 जिसे सुर्खी बनाना हो गई मीडिया की लाचारी!
 टीआरपी की दौड़ में  मीडिया ने अमिताभ से ही अपनी हेडलाइन संवारी!

 बिग  बी का खबरों में आना तो लाजमी ही था क्योंकि आख़िर हजारों फिल्मों में न जाने कितने ही खलनायकों का संहार कर चुके बॉलीवुड के महानायक और 21वीं सदी के महाखलनायक कोरोना के बीच द्वंद  युद्ध जो शुरू हो चुका था! 
 हर घड़ी एक नया ट्वीट एक नई खबर एक नया स्टेटस नजर आने लगा!
 बिग बी पहुंचे नानावटी अस्पताल!
 बिग बी की सेहत में सुधार!
 Big B का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा कोरोना!
 बिग बी को नहीं  आया पिछले 12 घंटों से बुखार!
 बिग बी ने बाय करवट ली! 
अमिताभ के कच्छे में घुस गया कॉकरोच!
 शाकाल कोरोना ने अपने तहखाने में बिग बी को कैद कर लिया!
खबरों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. .. सिलसिला फिल्म में खावे गोरी का यार बलम तरसे में अमिताभ के साथ ठुमके लगाने वाली बॉलीवुड अदाकारा रेखा को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया।
  खबर नवीसों को एक नई  खबर मिल गई। कोरोना हुआ अमिताभ को पर बंगला रेखा का  सील!" उधर जया बच्चन कोरोना नेगेटिव पाई गई  तो खबर चलने लगी कि "आखिर कब तक चलेगा ये सिलसिला ??" . .. 

इस सबके बीच कुछ आलोचना करने वाले लोग भी हैं जो मीडिया के इस प्रो-अमिताभ रवैए की आलोचना कर रहे हैं। क्या करें यह बेचारे अपनी आदत से मजबूर हैं  कुछ भी हो इन्हें अपना  पॉइंट ऑफ यू देना होता है बस ! उनका कहना है कि  एक व्यक्ति को इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। इनका कहना है कि बच्चन साहब तो एक समृद्ध और सुविधा संपन्न व्यक्ति हैं अपना इलाज करवाने में सक्षम हैं। खबर तो उन लोगों की दिखाई जानी चाहिए जिनके पास कोरोना का टेस्ट करवाने के लिए अस्पताल जाने का टिकट भी नहीं है!

मगर इन लोगों ने शायद कालिया फिल्म का वो डायलॉग नहीं सुना कि "हम जहां हैं खड़े होते हैं लाइन वहीं से शुरू होती है" और कोरोना की फिल्म में भी कुछ ऐसा ही हुआ! अमिताभ को कोरोना होने की ने खबर ने आठ लाख संक्रमितों और 30,000  मृतकों  को लाइन को पीछे छोड़  दिया। 

इसी बीच  पता चला कि कोरोना की लाईन ने बच्चन साहब के घर के ही 54 सदस्यों को अपनी गिरफ्त में ले लिया! मुझे गांधी जी पर  पढ़ी वो कविता याद आ गई: "चल पड़े जिधर दो डग मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर!" जिसका अर्थ है कि महानायक जिस ओर दो कदम चलते हैं करोड़ों लोग उसी ओर चल पड़ते हैं! 

बहरहाल कोई  शहंशाह माने, डॉन माने या फिर महानायक! इस खबर के बाद यह साबित हो चुका है कि दुनिया की नजर में बेशक अमिताभ एक महान नायक हों पर प्रकृति  की नजर में वह महामानव नहीं हैं! उसकी नजर में जूता पॉलिश करने वाला एक अनाथ बच्चा और  करोड़ों अरबों खरबों की संपत्ति का मालिक दोनों बराबर है! 

वैसे इन दिनों आपमें से बहुत सारे लोग भी इस मुगालते में हैं कि करोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता तो एक बार फिर सुन लीजिए कि कोरोना जब सदी के महानायक को भी महामानव नहीं मानता तो फिर आप किस खेत की मूली हैं!  इसलिए हम आप सबसे सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता का पालन करने का अनुरोध करते हैं। और जिन लोगों को कोरोना संक्रमण हो चुका है उनके स्वस्थ होने की कामना करते हैं।






Thursday, 9 July 2020

'विकास' के एनकाउंटर का सच!

आखिर विकास का एनकाउंटर हो गया। विकास को पकड़ना तो आदि काल से ही मुश्किल ही  नहीं नामुमकिन रहा है, क्योंकि वह कब कहां होता है यह आज तक किसी को पता ही नहीं चल पाया! मगर विकास भी ये जान चुका था कि अब उसका सच बेनकाब हो चुका है। वो इस बात को बखूबी समझ चुका था कि अब वह लोगों को किसी तरह से और अधिक समय तक  गुमराह नहीं कर पाएगा। इसलिए उसने सरेंडर करने का इरादा बनाया और इसके लिए उसे सबसे मुफीद जगह नजर आई मंदिर! मंदिर में हुआ विकास!! अरे पूरा वाक्य तो सुन लीजिए: मंदिर में हुआ विकास सरेंडर!
महाकालेश्वर धाम में विकास ने अपने  होने का उद्घोष किया। उसने बताया कि जिसे लोग यहां वहां ढूंढ रहे हैं वह विकास यहां मंदिर में मौजूद है। विकास ने आस्था के पवित्र धाम को भी कलंकित करने का पूरा प्रयास किया। अपनी साख बचाने के लिए आखिर उसे मंदिर ही सबसे सुरक्षित जगह नजर आई। विकास समझदार था इसीलिए उसने अपनी जान बचाने के लिए मंदिर का सहारा लिया क्योंकि उसने जिस तरह लोगों के विश्वास का खून किया था, ऐसे में उसे भगवान के सिवा कोई और बचा भी नहीं सकता था। मगर भगवान भी उसे कब तक बचा लेते। 
वैसे कानपुर से काफी पास में अयोध्या का प्रसिद्ध राम मंदिर भी है। विकास चाहता तो वहां भी जा सकता था मगर शायद वो यह जान चुका था कि उत्तर प्रदेश में अब वह राम के नाम पर नहीं बच पाएगा इसलिए उसने इस बार कालों के काल महाकाल के दरबार को अपने संरक्षण के लिए चुना मगर शायद वह भूल गया कि पुरुषोत्तम श्रीराम तो आदर्शों और मर्यादा से बंधे होने के कारण एक बार विकास को माफ कर सकते थे मगर शिव के  क्रोध की ज्वाला के आगे तो ऐसे फर्जी विकास भस्म हो जाया करते हैं।
शिव के तांडव से विकास अब 'काश' हो जायेगा! अब अगले कुछ समय के लिए विकास की खोज बंद हो गई जायेगी। मगर सृजन और विनाश सृष्टि के अकाट्य सत्य हैं और विकास भी इसका अपवाद नहीं!  वह दीर्घकालिक हो सकता है पर उसका अंत सुनिश्चित है। किंतु अंत भी शाश्वत नहीं इसलिए विकास का पुनर्जन्म भी हो सकता है!

  आप को निर-उत्तर छोड़े जा रहा हूं क्योंकि इन दिनों में विकास दक्षिण में हो रहा है! 

                                                 -मशाल मैन

Wednesday, 17 June 2020

फिर से गलवां घाटी में, भारत का ध्वज फहराएगा!

गलवां घाटी में भिड़े शत्रु से, मातृभूमि की रक्षा को!
जो खेत रहे, बन्दूक बिना, है नमन सदा उन वीरों को!

उनके बलिदानों की गाथा, इतिहास सदा ही गाएगा।
ड्रैगन कितनी ही आंख दिखा, तू हमसे पार न पाएगा।

अपने छल से छलनी करना, ये तेरी चाल पुरानी है।
तू दगाबाज था दगाबाज है, छलना ही तेरी निशानी है

पंचशील का उल्लंघन बासठ में, फिर से आज किया।
शांतिदूत भारत पुत्रों को, धोखे से तूने मार दिया।


हिंदी चीनी भाई-भाई! कहकर बासठ में युद्ध किया।
अब कोरोना के संकट में, कायर तूने फिर क्षुब्ध किया।

चीनी चालों की चतुराई, समझो ऐ भारत वालो!

मत खोना तुम अपना धीरज, ओ सीमा के रखवालो।

एक ओर महामारी से, इक ओर चीन से लड़ना है 
यही नहीं नेपाल-पाक से भी सीमा पर भिड़ना है


महामारी और अर्थव्यवस्था के संकट की इस बेला में..

नेपाल, चीन और पाक से घिरा, भारत पड़ा अकेला है 

संकट की बेला में देखो, धीरज है सफल सवारी।

कूटनीति की चाल रही है, सदा युद्ध पे भारी।


यदि होगा अपरिहार्य युद्ध तो, किंचित ना घबराएंगे 

अपना खून बहाकर हम दुश्मन की लाश बिछाएंगे।


एक लड़ेगा फिर लाखों से, चिड़ियों से बाज तड़ाएंगे।

शैतान, सोम, अब्दुल हमीद का, शौर्य पुन: दोहराएंगे।


यदि पड़ी जरूरत तो सीने को गोली की सेज बना देंगे।

एक कदम ना बढ़ने देंगे, दुश्मन की चूल हिला देंगे!


पर समय नहीं यह उचित कदाचित, सीमा पर खून बहाने का।

व्यापार चीन से बन्द करो, ये नाटक गले लगाने का।


चीनी सामानों की होली, भारत जो अगर जला देगा!

घुटनों पर आएगा ड्रैगन,  पीछे खुद कदम हटा लेगा!!


चाइनीज माल की नो एन्ट्री कर दो वो पल भी आएगा।

जब बीजिंग घुटनों पर चल कर , दिल्ली में शीश नवाएगा।


सेनाएं जाएंगी पीछे, ड्रैगन फिर मुंह की खाएगा।

फिर से गलवां घाटी में, भारत का ध्वज फहराएगा।










Monday, 15 June 2020

नव-अंकुर क्यों हो गया सु-शान्त!

मौत, हर पल हमारे सिर पे नाच रही है!
और हम हैं कि जिये जा रहे हैं...
मौत पर ही चर्चा किये जा रहे हैं...
मरना हकीकत है...ये जानते हैं। 
फिर भी मौत से भागने की 
कोशिश ..किये जा रहे हैं!!

सुशांत तो शांत हो गया..
बॉलीवुड मगर अशांत हो गया!

राजनीति, व्यापार और बॉलीवुड 
सब बपौती हैं अमीरजादों की..!
क्या इसीलिए ये असमयांत हो गया??

सपने बुनकर गांव से मुंबई जाने वाला हर युवा,
आज भयभीत और आक्रांत हो गया!!

जब तक रहेगा भाई-भतीजावाद, 
पनपता रहेगा तब तक
युवाओं में अवसाद!

'अकेलों' का हुनर.. 
ले न सकेगा कभी..
बराबरी के ओहदे का एहसास।

डूबती रहेंगी प्रतिभाएं,
लटकते रहेंगे फनकार!
भर न सकेंगे 'नव-अंकुर'..
'बपौती-धारकों' सी हुंकार!

एक तुम हो कि 
जब देखो बॉयकॉट करने लगते हो..
कभी चीन को.. तो,
कभी करन जौहर को
कभी अपनी बीवी को..
तो कभी अपने शौहर को।

अरे बॉयकॉट मत करो 
..सपोर्ट करो!!!
कभी ठेली वाले छोरे को..
तो कभी वॉलीवुड वाले 'छिछोरे' को

हर गांव! हर शहर! हर नुक्कड़!
शिकार है गैंगबाजी का
फर्क बस इतना है.. 
कभी शिकार शांत होता है 
तो कभी 'सु-शांत' होता है!

मशालमैन 




Tuesday, 26 May 2020

भीख मांगना, नहीं हो सकता अपराध!

सुनने में आया है कि कोर्ट ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी में मानने से इनकार कर दिया है. वैसे हमारे विचार से भीख मांगने में इंसान को कोई मजा नहीं आता होगा.  कोई भी इंसान मजबूरी में ही भीख मांगता होगा. फिर दूसरी बात यह है कि भीख मांगना कोई इतना आसान काम तो नहीं भाई! भीख मांगने के लिए भी तो मेहनत करनी पड़ती है. दोपहर की धूप में चौमांस की बारिश में, कड़ाके की सर्दी में, शरीर पर बगैर कपड़ों के इधर से उधर घूमना और हर आते-जाते आदमी के आगे हाथ फैलाना, क्या यह कम मेहनत का काम है?? 

फिर हमारे देश में तो भीख मांगने को बड़ी ऊंची मान्यता है. आज से नहीं बल्कि सदियों से हमारे यहां साधु संन्यासी लगातार बड़े गर्व के साथ भीख मांगते चले आ रहे हैं. गाहे-बगाहे शादी बारातों में चले आने वाले पंडित जी का भी तो इनडायरेक्टली यही काम है. इन सबसे ऊपर एक बात यह भी है कि आखिर कौन भीख नहीं मांग रहा है इस दुनिया में??? हर आदमी तो भीख मांगी रहा है! नेता, जनता से वोट की भीख मांग रहा है और जनता नेता से अधिकार मांग रही है, थोड़ा बहुत काम भी मांग रही है ताकि उसे सड़क पर भीख ना मांगनी पड़े! ऑफिसों में देख लीजिए कर्मचारी, अधिकारियों से प्रमोशन मांग रहे हैं और अधिकारी-कर्मचारी से दुनिया भर का काम मांग रहे हैं, करने लायक भी और ना करने लायक भी! ऐसे में भला भीख मांगने को अपराध ठहराया जाना ठीक भी नहीं था. कोर्ट ने जो फैसला लिया है सही ही लिया है! 

अरे भाई! भूखे-प्यासे मरने से अच्छा तो भीख मांगना है ही!  और भिखारी क्या अपराध करता है? दिन भर मेहनत करता है, बेचारा सड़कों पर मारा मारा फिरता  है. कभी इस मोड़ से उस मोड़ तो कभी इस रेड लाइट से उस रेड लाइट और कभी इस चौराहे से उस चौराहे. कभी इस गाड़ी के आगे तो कभी उस गाड़ी के आगे और मजे की बात देखिए कि सौ लोगों के  भीख ना देने के बाद भी वह एक सौ एकवें आदमी के आगे उसी अधिकार, उसी साहस और उसी पुरुषार्थ के साथ हाथ फैलाता है. आखिर इसके बदले में उसको कुछ तो मिलना ही चाहिए. 

इतना चलना फिरने के कारण भिखारी को कभी डायबिटीज को नहीं होता पर फिर भी उसे स्वास्थ्य बीमा तो कराना ही पड़ता है क्योंकि कुछ हो या ना हो पर उसे कैंसर जरूर हो सकता है. वह चलते फिरते तंबाकू, बीड़ी और गुटखा वगैरा तो खाता ही रहता है, और कभी कभार शाम को 100 -200  रुपए क्वार्टर पर भी खर्च कर लेता है. लोग शराब की दुकान पर खड़े किसी भिखारी को  बड़ी बुरी नजर से देखते हैं और कहते हैं "यह देखो! यहीं खड़ा होकर दिनभर हमसे भीख मांगता है और रात को शराब की दुकान पर हमारे सामने हमसे अच्छी शराब खरीदता है!" पर एक बात सोचिए जब हम लोग नॉर्मल रूटीन वाले ऑफिस में वह भी  एयर कंडीशन में बैठकर टेंशन में आ जाते हैं और शाम को दो पैग लगाने से पीछे नहीं हटते  तो दिन भर धूप में धक्के खाने वाला, दर-दर की ठोकरें खाने वाला भिखारी..! उसे कितना टेंशन होता होगा? अगर वह कभी कबार बल्कि यूं कहिए कि अगर रोज भी एक क्वाटर पी ले रहा है तो इसे गलत नहीं समझा जाना चाहिए  भाई!

भिखारियों पर उंगली उठाने वाले बुद्धिजीवी और ज्ञानी लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भिखारी हमारी संस्कृति हैं. भिखारियों को हमने सदियों से पनाह दी है. और जिस तरह हमारे देश में रोजगार की निरंतर कमी हो रही है उसे देखते हुए हमें भविष्य में भी भिखारियों को ना केवल बर्दाश्त करना पड़ेगा बल्कि भीख मांगने को एक प्रोफेशन के रूप में भी मान्यता देनी  पड़ेगी. इसलिए हमें कोर्ट के फैसले की गहराई को समझना चाहिए और भीख मांगने को हमारे समाज का एक अनिवार्य पहलू मान लेना चाहिए. आखिर राहु केतु और शनि मंगल की दशाओं  से बचाव करने के लिए इन भिखारियों की भूमिका कुछ कम तो नहीं है! इसी बहाने सही, कुछ लोग भूखे मरने से तो बच रहे हैं, वरना यहां किसे पड़ी है गरीब जनता की..!

 मशाल मैन