Monday, 15 June 2020

नव-अंकुर क्यों हो गया सु-शान्त!

मौत, हर पल हमारे सिर पे नाच रही है!
और हम हैं कि जिये जा रहे हैं...
मौत पर ही चर्चा किये जा रहे हैं...
मरना हकीकत है...ये जानते हैं। 
फिर भी मौत से भागने की 
कोशिश ..किये जा रहे हैं!!

सुशांत तो शांत हो गया..
बॉलीवुड मगर अशांत हो गया!

राजनीति, व्यापार और बॉलीवुड 
सब बपौती हैं अमीरजादों की..!
क्या इसीलिए ये असमयांत हो गया??

सपने बुनकर गांव से मुंबई जाने वाला हर युवा,
आज भयभीत और आक्रांत हो गया!!

जब तक रहेगा भाई-भतीजावाद, 
पनपता रहेगा तब तक
युवाओं में अवसाद!

'अकेलों' का हुनर.. 
ले न सकेगा कभी..
बराबरी के ओहदे का एहसास।

डूबती रहेंगी प्रतिभाएं,
लटकते रहेंगे फनकार!
भर न सकेंगे 'नव-अंकुर'..
'बपौती-धारकों' सी हुंकार!

एक तुम हो कि 
जब देखो बॉयकॉट करने लगते हो..
कभी चीन को.. तो,
कभी करन जौहर को
कभी अपनी बीवी को..
तो कभी अपने शौहर को।

अरे बॉयकॉट मत करो 
..सपोर्ट करो!!!
कभी ठेली वाले छोरे को..
तो कभी वॉलीवुड वाले 'छिछोरे' को

हर गांव! हर शहर! हर नुक्कड़!
शिकार है गैंगबाजी का
फर्क बस इतना है.. 
कभी शिकार शांत होता है 
तो कभी 'सु-शांत' होता है!

मशालमैन 




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