Wednesday, 17 June 2020

फिर से गलवां घाटी में, भारत का ध्वज फहराएगा!

गलवां घाटी में भिड़े शत्रु से, मातृभूमि की रक्षा को!
जो खेत रहे, बन्दूक बिना, है नमन सदा उन वीरों को!

उनके बलिदानों की गाथा, इतिहास सदा ही गाएगा।
ड्रैगन कितनी ही आंख दिखा, तू हमसे पार न पाएगा।

अपने छल से छलनी करना, ये तेरी चाल पुरानी है।
तू दगाबाज था दगाबाज है, छलना ही तेरी निशानी है

पंचशील का उल्लंघन बासठ में, फिर से आज किया।
शांतिदूत भारत पुत्रों को, धोखे से तूने मार दिया।


हिंदी चीनी भाई-भाई! कहकर बासठ में युद्ध किया।
अब कोरोना के संकट में, कायर तूने फिर क्षुब्ध किया।

चीनी चालों की चतुराई, समझो ऐ भारत वालो!

मत खोना तुम अपना धीरज, ओ सीमा के रखवालो।

एक ओर महामारी से, इक ओर चीन से लड़ना है 
यही नहीं नेपाल-पाक से भी सीमा पर भिड़ना है


महामारी और अर्थव्यवस्था के संकट की इस बेला में..

नेपाल, चीन और पाक से घिरा, भारत पड़ा अकेला है 

संकट की बेला में देखो, धीरज है सफल सवारी।

कूटनीति की चाल रही है, सदा युद्ध पे भारी।


यदि होगा अपरिहार्य युद्ध तो, किंचित ना घबराएंगे 

अपना खून बहाकर हम दुश्मन की लाश बिछाएंगे।


एक लड़ेगा फिर लाखों से, चिड़ियों से बाज तड़ाएंगे।

शैतान, सोम, अब्दुल हमीद का, शौर्य पुन: दोहराएंगे।


यदि पड़ी जरूरत तो सीने को गोली की सेज बना देंगे।

एक कदम ना बढ़ने देंगे, दुश्मन की चूल हिला देंगे!


पर समय नहीं यह उचित कदाचित, सीमा पर खून बहाने का।

व्यापार चीन से बन्द करो, ये नाटक गले लगाने का।


चीनी सामानों की होली, भारत जो अगर जला देगा!

घुटनों पर आएगा ड्रैगन,  पीछे खुद कदम हटा लेगा!!


चाइनीज माल की नो एन्ट्री कर दो वो पल भी आएगा।

जब बीजिंग घुटनों पर चल कर , दिल्ली में शीश नवाएगा।


सेनाएं जाएंगी पीछे, ड्रैगन फिर मुंह की खाएगा।

फिर से गलवां घाटी में, भारत का ध्वज फहराएगा।










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