महाकालेश्वर धाम में विकास ने अपने होने का उद्घोष किया। उसने बताया कि जिसे लोग यहां वहां ढूंढ रहे हैं वह विकास यहां मंदिर में मौजूद है। विकास ने आस्था के पवित्र धाम को भी कलंकित करने का पूरा प्रयास किया। अपनी साख बचाने के लिए आखिर उसे मंदिर ही सबसे सुरक्षित जगह नजर आई। विकास समझदार था इसीलिए उसने अपनी जान बचाने के लिए मंदिर का सहारा लिया क्योंकि उसने जिस तरह लोगों के विश्वास का खून किया था, ऐसे में उसे भगवान के सिवा कोई और बचा भी नहीं सकता था। मगर भगवान भी उसे कब तक बचा लेते।
वैसे कानपुर से काफी पास में अयोध्या का प्रसिद्ध राम मंदिर भी है। विकास चाहता तो वहां भी जा सकता था मगर शायद वो यह जान चुका था कि उत्तर प्रदेश में अब वह राम के नाम पर नहीं बच पाएगा इसलिए उसने इस बार कालों के काल महाकाल के दरबार को अपने संरक्षण के लिए चुना मगर शायद वह भूल गया कि पुरुषोत्तम श्रीराम तो आदर्शों और मर्यादा से बंधे होने के कारण एक बार विकास को माफ कर सकते थे मगर शिव के क्रोध की ज्वाला के आगे तो ऐसे फर्जी विकास भस्म हो जाया करते हैं।
शिव के तांडव से विकास अब 'काश' हो जायेगा! अब अगले कुछ समय के लिए विकास की खोज बंद हो गई जायेगी। मगर सृजन और विनाश सृष्टि के अकाट्य सत्य हैं और विकास भी इसका अपवाद नहीं! वह दीर्घकालिक हो सकता है पर उसका अंत सुनिश्चित है। किंतु अंत भी शाश्वत नहीं इसलिए विकास का पुनर्जन्म भी हो सकता है!
आप को निर-उत्तर छोड़े जा रहा हूं क्योंकि इन दिनों में विकास दक्षिण में हो रहा है!
-मशाल मैन
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