पीने दो मुझे!
भूल जाने दो ....
मेरी छद्म हकीकत को!
झूठी पहचान को !
और देख लो बगैर कपड़ों वाले
एक नंगे इंसान को।
जो बिल्कुल वैसा है
जैसे नन्हें बेअक्ल बच्चे
एकदम सहज
स्वछंद और मुक्त ,
झूठे प्रपंचों भेदभावों
और ऊंचनीचों से
एकदम कहीं दूर....
बामन चमार हिन्दू मुसलमान
यादव और जाट
सबसे दूर...
दूर नफरत की हर दीवार से
जो खड़ी की है
तुम कपड़े वाले धूूूर्त मानवों ने ।
मुक्त अविरल बहती नदी को
कैद करने वालों .......
संभल जाओ !
वरना दफन हो जाओगे
किसी रोज......एक दिन
अपने ही बनाए शमशानों में !
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