Sunday, 12 April 2020

हमारा घर बनाने वाले वो बेघर लोग!

क्या होता है घर? 
घर, सुकून का दूसरा नाम है, 
थकान के बाद का आराम है, 
घर, हमारी नादानियों का फ़ेवरिट स्थान है 
हमारी हक़ीकत की असली पहचान है.!!

घर नाम है...:
प्रेम और आनंद की फुहार का! 
क्रोध के स्वच्छंद गुबार का!
भावनाओं की अभिव्यक्ति 
और हृदय के निश्चल उद्गार का।

जिसे छुपा कर जाहिर करते हो तुम;
उस आलिंगन और प्यार का!
सच कहूं तो मोक्ष का भौतिक पर्याय है घर!! 
जीवन यात्रा का सुंदरतम पड़ाव है घर।

पर कभी सोचा तुमने उनके बारे में 
जिनका घर... कभी रैन बसेरा..
तो कभी फ्लाईओवर का अंडर पास है!
कभी म्युनसिपल्टी  का पार्क 
तो कभी बस शेल्टर की छांव है!

इधर.. आशियाने की तलाश है ..
उधर लोगों की शक भरी निगाह है। 
बेघर होना बदकिस्मती ही नहीं रहता
बन जाता एक गुनाह है!!

जिस मजदूर ने ठेकेदार को अमीर बनाया,
हम सब के लिए घर, आलीशान बनाया;
उसके पास ही नहीं उसका अपना घर है!
हाय! कितना बेरहम, कितना बेदर्द मेरा शहर है!!

लॉकडाउन में जब हम सब, 
अपने-अपने घरों में आराम कर रहे हैं।
हमारा घर बनाने वाले वो बेघर लोग...
सड़क पर महामारी से दो-दो हाथ कर रहे हैं!

हाय री नियति! 
ये तेरा कैसा कहर है?
सबके लिये घर बनाने वाला, 
यहां खुद ही बेघर है!!


मशालमैन 

देश के उन तमाम बेघर लोगों को समर्पित जो लॉकडाउन में भी खुली सड़कों पर हैं।  जब हम सब बीमारी से बचने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं, उस वक्त भी ये बेघर लोग खुली सड़क पर महामारी के साथ द्वंद्व युद्ध (ambush) करने को मजबूर हैं।

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